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भारत ने हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लम्बी छलांग लगाई

बिजली की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए जलवायु और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के दोहन की सुरक्षा के दोहरे उद्देश्य को पूरा करने के निर्णायक कदम से नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने शासन के तीन वर्षों के दौरान अभी तक की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन योजनाओँ की शुरूआत करके हरित ऊर्जा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाया है।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन में प्रस्तुत भारत के इच्छित निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) के अनुरूप भारत प्रौद्योगिकी के स्थानांतरण की सहायता से 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित ऊर्जा संसाधनों से 40 प्रतिशत सकल विद्युत  ऊर्जा क्षमता को प्राप्त कर लेगा। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मेगा योजनाएं लागू की जा रही हैं। दूरदराज के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ग्रिड की आपूर्ति उपलब्ध नहीं है ऐसे क्षेत्रों में विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए ये पहल ऊर्जा की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
वर्तमान में देश में प्रति व्यक्ति विद्य़ुत की खपत विश्व की औसत खपत का पांचवा हिस्सा है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर जोर देने के पीछे तर्क देते हुए एमएनआरई अधिकारियों का कहना है कि देश की मौजूदा खपत लगभग 1150 बी यू है और इसे 2022 तक 1570 बी यू तक पहुंच जाना चाहिए। 420 बी यू की अतिरिक्त जरूरत में से 175 गीगावाट नवीकरणीय विद्यत के महत्वकांक्षी लक्ष्य के साथ सौर ऊर्जा से 140 बी यू, पवन ऊर्जा से 60 बी यू की प्राप्ति होगी। इस प्रकार 220 बी यू की परंपरागत विद्युत योजना से जरूरत पड़ेगी।

भारत में वाणिज्यिक रूप से दोहन की किये जाने वाले संसाधनों जैसे पवन-102 गीगावाट (80 मीटर की मास्ट ऊंचाई पर), लघु  हाइड्रो - 20 गीगावॉट, जैव-ऊर्जा - 25 गीगावॉटऔर 750 गीगावॉट सौर ऊर्जा3 प्रतिशत बंजर भूमि मानते हुए लगभग 900 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता है। अभी हाल में नवीनतम निविदा बोलियों में सौर और पवन बिजली दरों के रिकार्ड न्यूनतम  टैरिफ ने इस क्षेत्र में अन्य सकारात्मक आयाम जोड़े हैं।  बोलीदाताओं ने एक गीगावाट पवन निविदा के लिए 3.46 रुपये प्रति केडब्ल्यूएच और रीवा में 750 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्री स्थापित करने के ले लिए रुपये 2.97 प्रति केडब्ल्यूएच की दर का  उल्लेख किया है। इससे विद्युत और सौर ऊर्जा प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोत बन गये हैं। कम स्वच्छ ऊर्जा टैरिफ से जीवाश्म
से प्राप्त विद्युत के सामने प्रमुख चुनौतियां पैदा होंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विद्युत निकासी सुनिश्चित होती है तो डवेलपर्स टैरिफ को और भी कम कर सकते हैं। 
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इस बड़ी उपलब्धि से उत्साहित होकर  दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश सूत्रों के मुताबिक जल्दी ही सौर कृषि शुरू कर सकता है। इसक तहत किसान मौजूदा पंप सेटों के स्थान पर पवन ऊर्जा पंप लगाएंगे, जिससे फालतू बिजली अतिरिक्त आय के लिए ग्रिड को भेज दी जाएगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि सभी पनविद्युत परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं के तत्वाधान में लाने जैसे प्रोत्साहनों के साथ इस क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की योजनाएं विचारधीन हैं।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 2016-17 में 4000 मेगावाट के लक्ष्य की तुलना में 5400 मेगावाट से भी अधिक बिजली का उत्पादन करके पवन ऊर्जा क्षमता में एक अन्य रिकार्ड स्थापित किया है। इस वर्ष की उपलब्धि ने पिछले वर्ष में अर्जित 3423 मेगावाट की उच्च क्षमता वृद्धि को पीछे छोड़ दिया है।
अब सरकार ने सौर पार्कों  और अल्ट्रा मेगा सोलर पावर परियोजनाओँ के विकास के लिए 20,000 मेगावाट से 40,000 मेगावाट की  क्षमता बढ़ाने वाली योजना को भी मंजूरी दे दी है। इस बड़ी क्षमता से 500 मेगावाट और उससे ऊपर की क्षमता वाले कम से कम 50 सौर पार्कों की स्थापना सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार हिमालयाई और अन्य पहाड़ी राज्यों में जहां कठिन भूभाग को देखते हुए निकटवर्ती भूमि को प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है वहां इस योजना के तहत विचार किया जाएगा।
       केन्द्र की 8100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से 2019-20 तक सोलर पार्क और अल्ट्रा मेगा सोलर पावर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी, जब परिचालन से 64 बिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन हो जाएगा और इसके जीवन चक्र के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 55 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादन में भी कमी आएगी।
      दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के विकेंद्रीकृत वितरण जनरेशन (डीडीजी) के तहत कुल 852 परियोजनाएं (सौर पीवी पर आधारित) परिचालित हैं। एमएनआरई ने 20,000 मेगावाट की कुल क्षमता के कम से कम 25 सौर पार्कों के विकास के लिए एक योजना पहले ही लागू कर रखी है जो दिसंबर 2014 में शुरू की गई थी। 20,000 मेगावाट की कुल क्षमता के 34 से अधिक सौर  पार्कों को मंजूरी दी गई है जो विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सीपीएसयू और वीजीएफ (व्यवहार्यता गैप फंडिंग) के साथ सरकारी संगठन द्वारा सौर पीवी विद्युत परियोजना से जुड़ी 1000 मेगावाट ग्रिड की स्थापना करने की योजना के तहत अभी तक 450.55 करोड़ रुपये का कुल वीजीएफ जारी किया  जा चुका है। 90 करोड़ रुपये जल्दी ही जारी किये जाएंगे, जिससे जारी की गई कुल राशि 549.55 करोड़ रुपये हो जाएगी।
       योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति राशि में 15 सीपीएसयू और सरकारी संगठन के लिए 1037.26 मेगावाट की कुल स्वीकृत क्षमता में से 441.50 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं अब चालू हो गई हैं। कैनाल बैंक्स और कैनाल टोप्स पर सौर पीवी विद्युत संयंत्रों से जुडी ग्रिड के विकास हेतु पायलट परियोजनाओ को लागू करने के लिए आठ राज्यों को 50 मेगावॉट कैनाल टोप्स और 50 मेगावाट कैनाल बैंक सौर पीवी परियोजनाएं आवंटित की गई हैं। तीन मेगावॉट कैनाल टोप्स एसपीवी विद्युत परियोजनाओं और 16 मेगावाट कैनाल बैंक परियोजनाए इस वर्ष फरवरी तक चालू हो गई हैं। सरकार ने 2022 के अंत तक 175 गीगावाट नवीकरणीय विद्युत क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें पवन विद्युत से 60 गीगावाट, सौर विद्युत से 1000 गीगावाट, बायोमास विद्युत से 10 गीगावाट लघु जलविद्युत से 5 गीगावाट विद्युत क्षमता शामिल हैं।
      वर्ष 2016-17 के लिए16660 मेगावाट ग्रिड नवीकरणीय विद्युत (पवन 4000 मेगावाटसौर 12000 मेगावाटलघु जल 250 मेगावाटजैव-विद्युत 400 मेगावाट और अपशिष्ट से विद्युत 10 मेगावाट) उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ऑफ ग्रिड से बाहर नवीकरणीय प्रणाली के तहत 15 मेगावाट क्षमता समतुल्य अपशिष्ट ऊर्जा 60 मेगावाट क्षमता की लक्ष्य बायोमास गैर-बगासि से उत्पादन,10 मेगावाट बायोमास गैसीफायर के समतुल्य एक मेगावाट लघु पवन/हाईब्रिड प्रणालियां, 100 मेगावाट सौर फोटोवोल्टिक प्रणालियों एक मेगावाट सूक्ष्म पनबिजली एक लाख नग का लक्ष्य रखा गया है।
 उन्नत चूल्हा अभियान (यूसीए) के अधीन एमएनआरई के बायोमास कुक स्टोव डिविजन भी वन विश्राम गृह, ग्रामीण इलाकों के परिवारों ढाबा और अऩ्य इकाइयों आदि को मिड डे योजना के उन्नत स्टोव उपलब्ध करा रहा है।
      बायोगैस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट डिवीजन ने 2014-15 के दौरान 84,882 बायोगैस संयंत्र, 2015-16 को दौरान 74,705 संयंत्र और 2016-17 में अभी तक 47,304 संयंत्र स्थापित किए हैं। देश में लगभग 49.5 लाख बायोगैस संयंत्र कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 4 लाख घनमीटर बायोगैस उत्पादन होने का अनुमान है। इससे प्रतिवर्ष घरेलू आकार के 44.10 लाख एलपीजी सिलेंडरों की बचत होगी। नवीकरण ऊर्जा की निकासी सुनिश्चित करने के लिए 38,00 करोड़ रुपये का हरित ऊर्जा कॉरिडोर स्थापित किया जा रहा है।
 कई अन्य समानांतर पहल भी शुरू की गईं हैं, इनमें शामिल हैः नवीकरणीय उत्पादन दायित्व को मजबूती से लागू करने के लिए टैरिफ नीति में संशोधन, नवीकरणीय उत्पादन दायित्व उपलब्ध कराना, घरों की छत पर सौर पैनल, स्मार्ट सिटी के विकास के लिए मिशन स्टेटमेंट और गाइड लाइन के तहत 10 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा को जरूरी बनाना है, नए निर्माण या उच्चतर एफएआर के लिए घरों की छत पर जरूरी प्रावधान के लिय़े भवन उप नियमों में संशोधन, कर मुक्त सौर बांड जारी करना,छत पर सौर को गृह ऋण का हिस्सा बनाना, जरूरी नेट-मीटरिंग, द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय दाताओं से धन जुटाना सौर परियोजनाओं की स्थापना और रख रखाव के लिए सूर्य मित्रों का सृजन शामिल है।
·         लेखक यूएनआईके पूर्व संपादक हैं व्यापक रूप से यात्रा कर चुके पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी तीस साल के अपने कैरियर के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों को कवर किया है और भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य भी रहे हैं। इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं।

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